मोहब्बत का गम है मिले जितना कम है Hindi Sad Love Story

मुझे याद है वो दिन जब मैंने अपने सपनों के राजकुमार को पहली बार देखा था। मानो ज़मीन रुक गई हो,और मेरे पीछे वायलन बज रहा हो और तभी उसने मुझसे आ कर अपने ही घर का रास्ता पूछा।

अब आप लोग सोच रहे होंगे के कोई कैसे अपने ही घर का रास्ता पूछ सकता है, लेकिन ये बात सच है वो इस शहर में नया था ना ओर उसके मम्मी पापा ने घर शिफ्ट किया था।

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अरे-अरे मैं तो अपने बारे में बताना ही भूल गई में यानी अकु यानी अक्रती ओर ये राजकुमार कोई और नहीं मेरे पति देव है यानी हिमांशु और अभी 3 साल पहले ही हमारी शादी हुई है।

और ये पहली बार था जब मैने हिमांशु को देखा और वो कहीं ओर नहीं मेरे घर के बाजू वाले घर में रहता था मतलब मेरी शादी मेरे पड़ोसी से ही हुई है।

और मुझे याद है शादी के दिन मेरे दादाजी ने मुझे ये पासबुक थी ओर बोला था इसमें मैने 1000 रुपए डाल दिए है, मैने बोला लेकिन दादाजी ऐसा क्यों? दादाजी ने मुस्कुरा कर बोला की मेरी रानी ये पैसे नहीं है ये एक ज़िन्दगी की किताब है हिमांशु ओर मैंने एक साथ बोला किताब ?? मतलब

दादाजी ने बोला के जब भी कोई खुशी हो हमेशा इसमें कुछ पैसे डालना ओर उसपर लिख देना के किस चीज के लिए पैसे डाले है इसे तुम दोनों की यादे भी बनी रहेंगी और पैसे भी जुड़ जाएंगे।

“लेकिन अब सब कुछ बदल गया

मैं और हिमांशु डाइवोर्स के लिए अप्लाई कर चुके है

और हमे 6 महीने का समय मिला है”

आज मैं हिमांशु को बोलूंगी की इस अकाउंट को बंद कर के सारे पैसे निकाल लाए। उसी रात मैंने हिमांशु को बोला और अगले दिन जब हिमांशु बैंक में लाइन में लगा था।

वो पासबुक देख रहा था और उसने वो सभी यादें पड़ी और बिना काम किये वापस आ गया और मुझे बोला की तुम जा कर करो ये काम मुझे और भी कम है मैने भी गुस्से में बोल दिया ठीक है।

अगले दिन जब मैं बैंक पहुंची तब लाइन में लग कर पासबुक पढ़ रही थी पढ़ते-पढ़ते मेरी आंखों में पानी आ गया ओर मैंने ये सोचा के कैसे मैं हिमांशु से दूर हो गई ओर कैसे डाइवोर्स के लिए हम मान गए।

मैंने सोचा की घर पहुंच कर हिमांशु से बात करूंगी। जब मैं घर पहुंची देखा हिमांशु घर पर ही है ओर मेरे घर में आते ही उसने मुझे अपने गले लगा लिया और बोला :-

“मुझे पता था कि तुम भी ये काम नहीं कर पाओगे ओर वापस आ जाओगी।

मैने हिमांशु से माफी मांगी और कभी अलग ना होने का फैसला किया

आज इस बात को पूरा एक साल हो गया है”

लड़ाइयां किस में नहीं होती है बात ये है उन सभी बातो को भूल के आगे निकल जाने की अगर दादा जी ने ये पासबुक ना दी होती तो हम तो कब के अलग हो गए होते बिना सोचे की लड़ाई की जड़ क्या है हम अपने सभी अच्छे पलो को भूल जाते है लेकिन अब हम साथ है।

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